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Jeep Grand Cherokee Signature Edition : जीप ग्रैंड चेरोकी सिग्नेचर एडिशन लॉन्च , जानें कीमत और फीचर्स

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Jeep Grand Cherokee Signature Edition : जीप इंडिया ने अपनी फ्लैगशिप एसयूवी ग्रैंड चेरोकी का नया लिमिटेड-रन वेरिएंट लॉन्च किया है। कीमत की बात करें तो सिग्नेचर एडिशन नाम के इस एक्सक्लूसिव पैक मॉडल की एक्स-शोरूम कीमत 69.04 लाख रुपये रखी गई है, जो टॉप-स्पेक लिमिटेड (०) ट्रिम से 1.54 लाख रुपये ज़्यादा है।
वहीं रंगों की की बात करें तो यह चार रंग विकल्पों में उपलब्ध होगाः सफ़ेद, काला, ग्रे और लाल।

डीलरशिप नेटवर्क
यह मॉडल आज से देश भर में कंपनी के डीलरशिप नेटवर्क पर बिक्री के वि उपलब्ध हो जाएगा। आइए जानते हैं कि इसमें क्या खास है।
रियर-सीट एंटरटेनमेंट सेटअप
इस मॉडल के अंदर महत्वपूर्ण अपग्रेड किए गए हैं। सिग्नेचर एडिशन में रियर-सीट एंटरटेनमेंट सेटअप दिया गया है, जिसमें दो 11.6 इंच के एंड्रॉइड-आधारित टचस्क्रीन शामिल हैं, जो बिल्ट-इन स्पीकर, वाई-फाई, ब्लूटूथ और AUX सपोर्ट के साथ आते हैं।
रियर डैश कैमरे
एक और खास बात यह है कि केबिन में फ्रंट और रियर डैश कैमरे लगे हुए हैं।

इंजन
सिग्नेचर एडिशन में वही 2.0-लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन लगा है जो 268 बीएचपी और 400 एनएम का टॉर्क देता है। इंजन 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन से जुड़ा है और जीप के क्वाड्रा-ट्रैक 4WD सिस्टम द्वारा समर्थित है। अपनी अतिरिक्त तकनीक और सुविधाओं के साथ, ग्रैंड चेरोकी सिग्नेचर एडिशन वोल्वो XC90, रेंज रोवर वेलार, मर्सिडीज-बेंज GLE, ऑडी Q7 और अन्य कारों के साथ प्रतिस्पर्धा करता है।

गौतम गंभीर के परिवार पर आयी बड़ी मुसीबत! इंग्लैंड दौरे से वापस भारत लौटे हेड कोच

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Gautam Gambhir family emergency: भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर को अचानक इंग्लैंड दौरा छोड़कर स्वदेश लौटना पड़ा है। फेमिली इमरजेंसी के कारण वह टेस्ट सीरीज से पहले भारत लौटे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, गौतम गंभीर की मां को हार्ट-अटैक आया था। जिसकी वजह से गंभीर को घर लौटना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय टीम के हेड कोच गौतम गंभीर, इंडिया बनाम इंडिया-ए के इंट्रा स्क्वॉड मैच से कुछ घंटे पहले ही इंग्लैंड से भारत लौट आए हैं। गंभीर की मां को दिल का दौरा पड़ा और वो आईसीयू में भर्ती हैं। गंभीर गुरुवार को टीम इंडिया के अभ्यास सत्र का हिस्सा नहीं थे। 17 जून तक उनके टीम से वापस जुड़ने की उम्मीद है।

गंभीर की गैर-मौजूदगी में, शुक्रवार से चार दिवसीय इंट्रा-स्क्वाड मैच टीम के बल्लेबाजी कोच सीतांशु कोटक और गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल के नेतृत्व में खेलने की संभावना है। बता दें कि इंग्लैंड और भारत के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच 20 जून से लीड्स में खेला जाना है। भारतीय टीम के हेड कोच के तौर पर गंभीर का यह पहला इंग्लैंड दौरा है।

इंग्लैंड दौरे पर गंभीर की नए कप्तान शुबमन गिल के साथ पहली अग्निपरीक्षा होगी, क्योंकि टीम तीन दिग्गजों रविचंद्रन अश्विन, रोहित शर्मा और विराट कोहली के संन्यास के बाद बड़े बदलाव से गुजर रही है। दूसरी तरफ, साई सुदर्शन और करुण नायर जैसे खिलाड़ियों के पास एक बड़ा मौका होगा।

इंग्लैंड में टीम इंडिया ने अहमदाबाद प्लेन क्रैश के मृतकों को दी श्रद्धांजलि, प्लेयर्स और सपोर्ट स्टाफ ने बांधी काली पट्टी

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Tributes paid to the victims of the Ahmedabad plane crash: अहमदाबाद प्लेन क्रैश में 241 लोगों की मौत से पूरा देश गम में डूबा हुआ है। हर कोई मृतकों की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए उन्हे श्रद्धांजलि दे रहा है। इसी कड़ी में इंग्लैंड में मौजूद भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ ने प्लेन क्रैश के लोगों श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधे नजर आए।

बीसीसीआई ने शुक्रवार को अहमदाबाद प्लेन क्रैश के मृतकों को श्रद्धांजलि देने की फोटो शेयर की। बोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कुछ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, ‘बेकेनहैम में खेले गए इंट्रा-स्क्वाड गेम में शामिल खिलाड़ी और सहयोगी स्टाफ के सदस्य काली पट्टियाँ पहने हुए हैं। अहमदाबाद विमान दुर्घटना में मारे गए लोगों के प्रति सम्मान और प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता के प्रतीक के रूप में आज एक मिनट का मौन भी रखा गया।’

बता दें कि इंग्लैंड और भारत के बीच पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मैच 20 जून से लीड्स में खेला जाना है। इससे पहले तैयारियों के मद्देनजर भारतीय टीम शुक्रवार से चार दिवसीय इंट्रा-स्क्वाड मैच खेलेगी। इंग्लैंड दौरे पर हेड कोच गौतम गंभीर की नए कप्तान शुबमन गिल के साथ पहली अग्निपरीक्षा होगी, क्योंकि टीम तीन दिग्गजों रविचंद्रन अश्विन, रोहित शर्मा और विराट कोहली के संन्यास के बाद बड़े बदलाव से गुजर रही है।

पेशाब करते वक्त बन रहा है झाग तो शरीर के अंदर हो रही है ये गड़बड़ी, जरूर करवाएं ये टेस्ट

नई दिल्ली : पेशाब करते वक्त बन रहा है झाग तो शरीर के अंदर हो रही है ये गड़बड़ी, जरूर करवाएं ये टेस्ट पेशाब के रंग में बदलाव, जलन और पेशाब करते समय झाग आना कई बीमारियों के संकेत हो सकते हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. बल्कि समय रहते आपको इन टेस्ट को जरूर करवाना चाहिए.

पेशाब में झाग आना किस बीमारी के हैं लक्षण

पेशाब में झाग आना कई बार नॉर्मल बात हो सकती है, लेकिन अगर ऐसा बार-बार होता है, तो यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है. पेशाब के रंग में बदलाव, पेशाब में जलन और पेशाब करते समय झाग आना कई बीमारियों के संकेत हो सकते हैं और इन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए.

आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति इस तरह की समस्या से गुजर रहे हैं तो आप उन्हें तुरंत डॉक्टर के पास जाने की सलाह दें. यह आपकी सेहत से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है. इंडिया टीवी इंग्लिश पॉर्टल में छपी खबर के मुताबिक पेशाब में झाग आने के क्या कारण हैं और ऐसी स्थिति में आपको कौन-से टेस्ट करवाने चाहिए इस पर विस्तार से बात करेंगे.

पेशाब में झाग आने के पीछे ये गंभीर समस्याएं हो सकती हैं:

शरीर में प्रोटीन का लेवल बढ़ना: किडनी की समस्याओं के कारण पेशाब में प्रोटीन आ सकता है, जिससे झागदार पेशाब आ सकता है.

किडनी की समस्याएं: अगर किडनी ठीक से काम नहीं करती है, तो पेशाब में झाग आ सकता है. दरअसल, किडनी से जुड़ी समस्याएं भी पेशाब में झाग आने का एक बड़ा कारण हो सकती हैं.

डायबिटीज: मधुमेह के रोगियों के पेशाब में अधिक चीनी झाग का कारण बन सकती है. जब शरीर में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ जाता है, तो पेशाब में झाग बन सकता है.

पेशाब के रास्तें में इंफेक्शन (यूटीआई) या प्रोस्टेट की समस्या भी झागदार पेशाब का कारण बन सकती है.

पेशाब में झाग आने पर कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?

यूरिन रूटीन टेस्ट: पेशाब में प्रोटीन, ग्लूकोज और अन्य तत्वों की जांच के लिए यह जरूरी है.

ब्लड टेस्ट (किडनी फंक्शन टेस्ट): किडनी की कार्यप्रणाली जानने के लिए यह टेस्ट करवाएं.

माइक्रोएल्ब्यूमिन टेस्ट: पेशाब में प्रोटीन की मात्रा की जांच करता है.

अल्ट्रासाउंड (किडनी और प्रोस्टेट जांच): किडनी और मूत्र पथ की स्थिति की जांच करने के लिए.

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

अगर पेशाब में बार-बार झाग आता है. पेशाब का रंग गहरा पीला, लाल या असामान्य होता है. पेशाब करते समय जलन, दर्द या किसी तरह की तकलीफ होती है और शरीर में सूजन होती है.

हड्डियों की कमजोरी और कम उम्र में गठिया की दिक्कत? इन वजहों से बढ़ रही हैं ऐसी समस्याएं

नई दिल्ली. शारीरिक संरचना और स्थिरता को ठीक रखने के लिए हड्डियों का स्वस्थ रहना सबसे आवश्यक माना जाता है। शारीरिक संरचना को ठीक रखने के अलावा, महत्वपूर्ण अंगों की रक्षा करने, मांसपेशियों को सुरक्षा देने और कैल्शियम के भंडारण में भी हड्डियों की विशेष भूमिका होती है। इसमें होने वाली किसी भी प्रकार की समस्या का असर शरीर की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, यही कारण है सभी लोगों को कम उम्र से ही हड्डियों को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। हालांकि देखा गया है कि कुछ कारकों के चलते कम उम्र के लोगों में हड्डियों की कमजोरी और इससे संबंधित कई प्रकार के रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हमारी हड्डियों में प्राकृतिक तौर से लगातार बदलाव होता रहता है। नई हड्डियां बनती हैं और पुरानी हड्डियां नष्ट होती रहती हैं। हालांकि नई हड्डियों के निर्माण के लिए शरीर को नियमित रूप से कई प्रकार के आवश्यक पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जिसे भोजन के माध्यम से प्राप्त करना बहुत आवश्यक माना जाता है।

हमारी जीवनशैली और आहार से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं के कारण हड्डियों के घनत्व को नुकसान पहुंच सकता है। आइए जानते हैं कि किन वजहों से कम उम्र में ही लोगों में हड्डियों की कमजोरी और इससे संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है?

कैल्शियम हमारे शरीर के लिए आवश्यक अति महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। हड्डियों के साथ-साथ दांतों की मजबूती के लिए भी इस पोषक तत्व की सभी को आवश्यकता होती है। आहार में कैल्शियम की कमी होने से हड्डियों की समस्या विकसित होने का खतरा हो सकता, इसी प्रकार से विटामिन-डी की कमी के कारण भी हड्डियों की समस्या हो सकती है। भोजन के माध्यम से इन पोषक तत्वों को प्राप्त करना जरूर सुनिश्चित करें। इसके लिए डेयरी उत्पादों, हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना बेहतर विकल्प हो सकता है।

शारीरिक निष्क्रियता संपूर्ण शरीर के लिए नुकसानदायक मानी जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय होते हैं, उनमें अपने उम्र के अन्य लोगों की तुलना में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर समस्याओं के विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है।

नियमित व्यायाम और योग की आदत शरीर में रक्त के संचार को ठीक रखने के अलावा कई अन्य प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में आपके लिए लाभकारी हो सकती है।

दुनियाभर में तेजी से बढ़ती आर्थराइटिस की समस्याओं के लिए बढ़े वजन को प्रमुख कारक के तौर पर जाना जाता है। वजन अधिक होने से घुटनों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है जिससे हड्डियों के रोग विशेषकर गठिया की समस्या विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। मोटापा के कारण हड्डियों के नरम ऊतकों को क्षति और क्रोनिक ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं में वजन बढ़ने और इसके कारण गठिया की समस्या अधिक देखी जाती है।

शोध बताते हैं कि तंबाकू और शराब के सेवन की आदत से हड्डियां कमजोर होती हैं। तंबाकू के सेवन से हड्डियों के ऊतकों की क्षति का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा शोधकर्ताओं ने पाया कि शराब का सेवन ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ा देता है। तंबाकू और शराब के सेवन के कारण हड्डियों की बीमारियों के साथ फेफड़ों और हृदय से संबंधित समस्याओं का खतरा भी अधिक होता है। इस आदत से तुरंत दूरी बना लें.

खाना बनाने में करें सेंधा नमक का इस्तेमाल, सेहत को मिलेंगे जबरदस्त फायदे

नई दिल्ली. नमक के बिना खाना अधूरा है. किसी भी मसालेदार चीज को कितने ही अच्छे तरीके से बना लें, लेकिन जब तक उसमें नमक न डालें तब तक वो डिश खाने के काबिल नहीं होती है. सादा नमक में कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं. नमक की वजह से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाती है जो कई दिक्कतों की वजह बनती है. इससे ब्लड प्रेशर जैसी परेशानियां हो सकती हैं. वहीं अगर सेंधा नमक की बात करे तो ये सादा नमक के ठीक विपरीत है. सेंधा नमक में मौजूद गुण कई बीमारियों में फायदेमंद हैं. खाने में सेंधा नमक का इस्तेमाल करने की वजह से सेहत को कई फायदे होते हैं.

सेंधा नमक पाचन की परेशानियों को दूर करता है. मिनरल और विटामिन्स से भरपूर सेंधा नमक पेट को साफ करने का काम करता है, इसका इस्तेमाल पाचन ठीक करने के लिए कई दवाओं और पाउडरों को बनाने में किया जाता है. दही में सेंधा नमक डालकर पीने से पेट में बहुत ठंडक मिलती है. रोज के खाने में अगर सेंधा नमक डाला जाए तो पाचन की दिक्कतों से छुटकारा मिल सकता है.

सेंधा नमक में इलेक्ट्रोलाइट्स मौजूद होते हैं जो मांसपेशियों की ऐंठन को दूर करने का काम करते हैं. सेंधा नमक के सेवन से मांसपेशियों में अकड़न और दर्द की परेशानी में राहत मिल सकती है. सेंधा नमक में विटामिन K और पोटेशियम मौजूद होते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं.

सेंधा नमक में मौजूद औषधीय गुण गले की परेशानियों को दूर करते हैं. अगर गले में खराश की परेशानी हो तो सेंधा नमक को पानी में डालकर गरारे करने से खराश दूर हो सकती है. सेंधा नमक को खाने में डालकर खाने से भी गले में दर्द की परेशानी से छुटकारा मिल जाता है. इसमें डिकॉन्गेस्टेंट गुण मौजूद होते हैं जो बंद नाक और खांसी की परेशानी को दूर करने का काम करते हैं.

सेंधा नमक में पोटेशियम जैसे पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं. खाने में सादा नमक के बजाय सेंधा नमक का इस्तेमाल करना ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

जामुन के साथ भूलकर भी न खाए ये तीन चीज, वरना सेहत के लिए हो सकता है नुकसानदायक

नई दिल्ली। जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा सा फल है जिसे खाते ही बचपन की याद हो आती है. जीभ को भी जामुनी कर देने वाले छोटे-छोटे जामुन खाने-पीने के बीच में खा लिए जाते हैं जो कभी-कभार सेहत से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकता है. हालांकि, जामुन सादा खाने के बहुत से फायदे भी हैं जो शरीर को मिलते हैं. जामुन ही नहीं बल्कि इसके पत्ते भी आयुर्वेदिक औषधि की तरह इस्तेमाल में लाए जाते हैं. यहां जानिए जामुन के फायदे और इसे किन चीजों के साथ खाने से परहेज करना चाहिए.

जामुन फाइबर से भरपूर होता है जो पाचन को बेहतर करने में खासकर असर दिखाता है. इसे खाने पर लंबे समय तक पेट भरे होने का एहसास होता है. इसके अलावा इसमें विटामिन सी की अच्छी मात्रा पायी जाती है जो स्किन के लिए भी अच्छी है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने यानी इम्यूनिटी को बेहतर करने में भी अच्छा असर दिखाती है. डायबिटीज, स्किन से जुड़ी दिक्कतों और पेट दर्द में भी जामुन फायदेमंद साबित होता है. निम्न उन चीजों की सूची है जिन्हें जामुन के साथ नहीं खाना चाहिए. क्यों नहीं खाना चाहिए यह आप पढ़कर खुद जान जाएंगे.

दूध
जामुन के साथ दूध या दूध से बनी चीजों को खाने से खासा परहेज करना चाहिए. यदि आप जामुन खाने के तुरंत बाद दूध पीते हैं तो आपको पेट से जुड़ी दिक्कतें जैसे अपच, गैस और पेट दर्द हो सकता है. इसीलिए आपने अगर जामुन खाए हैं तो उसके ऊपर दूध ना पिएं या फिर दूध अभी-अभी पिया है तो जामुन तुंरत बाद ना खाएं.

हल्दी
हल्दी भी खाने की उन्हीं चीजों में शामिल है जिन्हें जामुन खाने के बाद नहीं खाना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि हल्दी जामुन के साथ रिएक्ट कर सकती है जिससे स्किन एलर्जी, पेट में दर्द और असहजता महसूस हो सकती है. इसलिए जामुन खाने के कम से कम आधे घंटे बाद तक हल्दी या हल्दी वाली किसी भी डिश को खाने से बचना चाहिए.

अचार
जामुन और अचार ऐसी चीजें हैं जिनका जिक्र आपने पहले शायद ही कभी सुना होगा और जाहिर सी बात है अगर इनसे नुकसान होता है तो इन्हें साथ जोड़ा ही ना जाए. अचार और जामुन को साथ खाने पर पेट बिगड़ सकता है और जी मिचलाना, उल्टी, गैस या दस्त की दिक्कत हो सकती है.

शरीर के इन अंगों में ये अजीब हरकते देती है अशुभ संकेत, करती है बड़ी मुसीबत का इशारा

नई दिल्ली. आपने अक्सर महसूस किया होगा कि न चाहते हुए भी आपकी आंखें फड़कने लगती हैं या शरीर का कोई दूसरा अंग फड़कता है. आपको बता दें कि शरीर के अंगों के फड़कने को शुभ और अशुभ से जोड़कर देखा जाता है. अगर आप इन संकेतों को समझ लें तो पहले ही अर्लट हो सकते हैं. शरीर के अंगों का फड़कना किसी गंभीर दुर्घटना से लेकर धन प्राप्ति की ओर इशारा करती हैं. आइए जानते हैं शरीर के ये अंग फड़ककर क्या संकेत देते हैं.

  1. अगर किसी महिला की दाईं आंख लगातार ब्लिंक करती है तो यह किसी गंभीर बीमारी की तरफ इशारा करती है जबकि बाईं आंख फड़कती है तो जल्द ही आपको कोई शुभ संकेत मिल सकता है. पुरुषों में इसके विपरीत स्थिति होती है. अगर किसी पुरुष की दाईं आंख फड़कती है तो यह शुभ माना जाता है लेकिन बाईं आंख के फड़कने को अशुभ माना जाता है.
  2. समुद्र शास्त्र के अनुसार पुरुषों के दोनों कंधों का फड़कना अच्छा नहीं माना जाता है. कंधों के फड़कने को घर में किसी कलह या विवाद का संकेत माना जाता है. इसके साथ ही पुरुषों के हाथ में होनी वाली खुजली किसी विपत्ती का संकेत होती है. समुद्र शास्त्र की मानें तो यह व्यक्ति के जीवन में आने वाली किसी बड़ी मुसीबत की ओर इशारा करती है. आपको बता दें कि अगर किसी व्यक्ति के बायें हाथ की हथेली में फड़कन होती है तो यह पुरानी बीमारी से जल्द ठीक होने की निशानी है.
  3. अगर किसी महिला की नाभि के पास कोई हलचल महसूस हो रही है तो यह किसी बड़ी मुसीबत की ओर इशारा करती है. खासकर इस संकट का ज्यादा खतरा तब होता है जब फड़कन दाईं तरफ महसूस होती है.

हर मर्ज की दवा है आंवला, फायदे जानकर तुरंत खाना कर देंगे शुरू

नई दिल्ली. आंवला औषधीय गुणों से भरपूर है. आंवला में मौजूद गुण सेहत के लिए बड़े फायदेमंद है. आंवले का इस्तेमाल कई दवाओं में किया जाता है. आंवला विटामिन सी के सबसे अच्छो स्त्रोतो में से है. इसमें विटामिन सी के अलावा विटामिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, कार्बोहाइड्रेट और फाइबर मौजूद होते हैं. इसमें पोटैशियम, कैल्शियम, ,मैग्निशियम और आयरन जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो कई बीमारियों में फायदेमंद हैं. अगर आंवले को अपनी डेली डाइट में शामिल कर लिया जाए तो सेहत से जुड़ी कई दिक्कतों में आराम मिल सकता है. आंवला पाचन, इम्युनिटी और इंफेक्शन जैसी दिक्कतों में फायदा पहुंचाता है.

डाइट में आंवले को शामिल कर पाचन से जुड़ी दिक्कतों से छुटकारा मिल सकता है. आंवले के सेवन से पाचन, कब्ज, अपच और गैस की परेशानी दूर हो जाती है. अगर आपको खाने के डाइजेशन में परेशानी होती है, ठीक से मल त्याग नहीं हो पाता है तो आंवले से बनी चीजें खाना शुरू कर दीजिए.

आंवला में मौजूद विटामिन सी इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर है. आंवला से बनी चीजों का सेवन करने से इम्यूनिटी बढ़ती है. इससे बीमारियों से लड़ने की शक्ति आती है. बीमारियों वाले मौसम में आंवला को डाइट में शामिल करने से सर्दी-जुकाम जैसे इंफेक्शन्स से बचा जा सकता है.

आंवला हड्डियों के लिए फायदेमंद माना जाता है. आंवले में कैल्‍शियम भरपूर मात्रा में होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाने के काम आता है. हड्डियों से जुड़ी परेशानियों जैसे ऑस्ट्रोपोरोसिस, अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द में भी आंवला के सेवन करने से आराम मिलता है. हड्डियों का दर्द दूर करने के लिए सुबह की डाइट में आंवला जूस शामिल करना बेहद फायदेमंद होगा.

आंवला हार्ट के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है. आंवला में मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे पोषक तत्व हार्ट की सेहत के लिए फायदेमंद हैं. आंवला में क्रोमियम बीटा हार्ट की नसों को ब्लोकेज से बचाता है जिससे हार्ट अच्छी तरह से काम करता है और हेल्दी बना रहता है.

आंवला आंखों के लिए बहुत फायदेमंद है. आंवला में मौजूद विटामिन सी आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है. आंवला से बनी चीजें जैसे जूस मुरब्बा और चटनी खाकर स्वाद के साथ-साथ आंखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है.

वजन घटाने के सफर को आसान बनाते हैं ये फूड आइटम्स, इनसे ब्लड शुगर भी रहता है कंट्रोल

नई दिल्ली। बात जब संतुलित आहार की होती है तो इसका मतलब है बॉडी को हर एक जरूरी न्यूट्रिएंट्स सही मात्रा में मिले। लो कार्ब, हाई प्रोटीन और फाइबर रिच डाइट न सिर्फ वजन कम करने में मददगार है बल्कि इससे ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल में रखा जा सकता है। कार्ब्स का सेवन कम करने से इंसुलिन का लेवल कम हो जाता है। नतीजतन, आपका शरीर ज्यादा मात्रा में ग्लूकागन हॉर्मोन का उत्पादन करता है, जो फैट बर्न में मदद करता है।

काबुली चना बहुत ही न्यूट्रिशियस होता है। इसमें अच्छी-खासी मात्रा में प्रोटीन और फाइबर मौजूद होता है जो वजन कम करने में बहुत ही मददगार होते हैं। प्रोटीन और फाइबर ये दोनों ही पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं जिससे लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास होता है। बार-बार भूख नहीं लगती जिससे ओवरइटिंग और अनहेल्दी इटिंग से बचा जा सकता है। तो अगर आप वजन कम करने की सोच रहे हैं, तो काबुली चने को जरूर अपनी डाइट में शामिल करें। इसका आप सलाद बनाकर खा सकते हैं या फिर हल्का भूनकर खाना भी फायदेमंद रहेगा।

योगर्ट क्रेविंग को शांत करने का काम करते हैं। ये प्रोटीन का बेहतरीन स्त्रोत है। अगर आपका बैली फैट बहुत ज्यादा है तब तो आपको योगर्ट का सेवन जरूर करना चाहिए क्योंकि इसमें कैल्शियम, प्रोटीन, प्रोबायोटिक्स और भी कई ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जिसकी हमारी बॉडी को आवश्यकता होती है। हाई प्रोटीन, लो कार्ब और लो फैट से भरपूर योगर्ट बेस्ट ऑप्शन है वजन कम करने वालों के लिए।

हेल्दी तरीके से वजन कम करने में सूरजमुखी के बीज बहुत ही अच्छे ऑप्शन हैं। ये बीज प्रोटीन, फाइबर के साथ ही विटामिन ई, फोलेट और कॉपर जैसे जरूरी मिनरल्स का भी खजाना होते हैं। और तो और ये बीज एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं जो डिमेंशिया जैसी खतरनाक बीमारी की संभावनाओं को कम करते हैं और ओवरऑल हेल्थ को सुधारते हैं। तो इन्हें आप स्नैक्स की तरह खा सकते हैं या फिर सब्जी, सलाद के ऊपर डालकर भी खा सकते हैं।