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अकेला नहीं आ रहा ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ शो! साथ आ रहा है ‘नागिन 7’ का बड़ा धमाका

मुंबई: ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ सीजन 2 की वापसी ने लाखों फैन्स को खुश कर दिया है. शो का पहला सीजन दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए बैठा है. जहां 25 साल बाद एकता कपूर का पॉपुलर शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ भी नए सीजन के साथ लौट रहा है, वहीं नागिन 7 का भी लोग लंबे वक्त से इंतजार कर रहे हैं. नागुन 6 को ऑफ एयर हुए दो साल से ज़्यादा समय हो गए हैं. अब, एकता कपूर ने ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ के साथ नागिन 7 से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है.

29 जुलाई से जहां ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ फिर से ऑन एयर होने जा रहा है. वहीं, खबर है कि उसी दिन एकता नागिन सीज़न 7 का टीजर भी रिलीज़ करने की प्लानिंग बना रही हैं. टेलीचक्कर की रिपोर्ट के अनुसार, नागिन 7 का पहला टीज़र 29 जुलाई को रिलीज़ किया जाएगा. यह तारीख इसलिए चुनी गई है क्योंकि इसी दिन नाग पंचमी का पावन त्योहार पड़ता है.

इस दिन दिखाई देगी ‘नागिन 7’ की पहली झलक
पहले टीज़र में आने वाले सीज़न की कहानी की झलक मिलेगी और लीड एक्ट्रेस का नाम भी सामने आ सकता है. यह दिन टेलीविजन दर्शकों के लिए बेहद खास है क्योंकि इसी दिन एकता कपूर का हिट शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ भी प्रीमियर हो रहा है. हालांकि, मेकर्स ने अभी तक इस खबर की पुष्टि नहीं की है. ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की बात करें तो नए सीजन में स्मृति ईरानी और अमर उपाध्याय लीड रोल में फिर से नजर आने वाले हैं.

इसके अलावा शो में शक्ति आनंद, रितु चौधरी, हितेन तेजवानी, गौरी प्रधान, कमलिका गुहा ठाकुरता और केतकी दवे भी अहम भूमिकाओं में हैं. पहला एपिसोड 29 जून से रात 10:30 बजे स्टार प्लस पर ऑन एयर होगा. इस बीच, नागिन 7 को लेकर चर्चा कई महीनों से चल रही है. बताया जा रहा था कि इसे इस साल की शुरुआत में शुरू किया जाना था. फरवरी में, एकता कपूर ने नागिन 7 की ऑफिशियल अनाउंसमेंट की और फैन्स को ये कंफर्मेशन दी कि शो बन रहा है.

2 साल बाद पर्दे पर लौटेगा ‘नागिन 7’
पिछले सीज़न की बात करें तो, नागिन 6 में तेजस्वी प्रकाश लीड रोल में थीं. इस शो में सिम्बा नागपाल, उर्वशी ढोलकिया और महक चहल भी मुख्य भूमिकाओं में थीं. नागिन 6 का प्रीमियर 12 फरवरी, 2022 को हुआ था और यह 9 जुलाई, 2023 तक ऑन एयर रहा था.

परीक्षा पेपर लीक मामले में सीबीआई अदालत ने आठ पूर्व रेलवे कर्मचारियों को सुनाई पांच-पांच साल की सजा

अहमदाबाद। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने परीक्षा पेपर लीक मामले में बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने रेलवे के पूर्व आठ कर्मचारियों को पांच-पांच साल की कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषियों पर पांच-पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश, अहमदाबाद ने सोमवार को आठ दोषियों को पांच-पांच साल के कारावास की सजा सुनाई। आपराधिक षडयंत्र, चोरी, चोरी की संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करने या रखने, अपराध के साक्ष्य को गायब करने, अपराध करने और आपराधिक कदाचार के मामले में प्रत्येक पर पांच-पांच लाख रुपए (कुल जुर्माना 40,00,000 रुपए) का भी जुर्माना लगाया गया है।

सजा पाने वाले दोषियों में पश्चिम रेलवे, वडोदरा स्थित डीआरएम कार्यालय के तत्कालीन हेड क्लर्क (ईडी) सुनील जसमल गोलानी, वडोदरा मंडल कार्यालय के तत्कालीन सीनियर सिफर ऑपरेटर महेंद्र व्यास, आनंद पश्चिमी रेलवे कंजारी बोरीयावी के तत्कालीन विद्युत सिग्नल अनुरक्षक-III राजेश कुमार गोस्वामी, वडोदरा के तत्कालीन विद्युत सिग्नल अनुरक्षक-III आनंद सोमाभाई मेरैया, वडोदरा मंडल अधिकारी के तत्कालीन हेड क्लर्क (ईडी) के प्रकाश सीतारामदास करमचंदानी, अहमदाबाद पश्चिम रेलवे कांकरिया के तत्कालीन सहायक डीजल चालक महबूब अली अब्दुलजब्बार अंसारी, तत्कालीन डीजल सहायक चालक परेश कुमार लालही भाई पटेल और रेलवे सुरक्षा बल अजमेर के कॉन्स्टेबल पप्पू बब्बा खान शामिल हैं।

सीबीआई ने तत्कालीन मुख्य सतर्कता निरीक्षक, पश्चिम रेलवे, अहमदाबाद की शिकायत के आधार पर कर्जन-बोरियावी के ईएसएम-III राजेश गोस्वामी और रेलवे विभाग के अन्य लोगों द्वारा प्रश्न पत्र लीक करने के संबंध में मामला दर्ज किया था।

आरोप है कि राजेश गोस्वामी और रेलवे के अन्य अज्ञात कर्मचारी, प्राइवेट व्यक्ति निर्धारित प्रोबेशनरी असिस्टेंट स्टेशन मास्टर के पद के लिए लिखित परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों से 50,000 रुपए से लेकर एक लाख रुपए तक की राशि वसूल रहे थे।

जांच के बाद सीबीआई ने 28 जुलाई 2003 को 8 आरोपियों और एक प्राइवेट व्यक्ति (जिसकी सुनवाई के दौरान मृत्यु हो गई) के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराया और उन्हें सजा सुनाई।

हर नागरिक की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता : सीएम योगी

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान यहां प्रदेश भर से लगभग 50 से अधिक पीड़ित पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी हर पीड़ित के पास स्वयं पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनी। इस दौरान सीएम योगी ने आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ खड़ी है। हर समस्या का निराकरण होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हर नागरिक की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। सीएम योगी ने ‘जनता दर्शन’ में आए दिव्यांगजनों की बात पर गौर करते हुए उन्हें मोटराइज्ड ट्राई साइकिल दिलाने को कहा। इसके अलावा, पुलिस, राजस्व, चिकित्सा सहायता, रोजगार, शिक्षा, आवास, कब्जा, परिवार आदि से जुड़े मामले भी आए, जिस पर प्रार्थना पत्र लेकर मुख्यमंत्री योगी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।

जनता की समस्या सुनते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को त्वरित और संतुष्टि परक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। सबको न्याय मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ आए बच्चों से भी बातचीत की। उनका हालचाल जाना, दुलार किया। बच्चों की पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली। सीएम योगी ने चॉकलेट-टॉफी प्रदान कर बच्चों को उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऑफिस (सीएमओ) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जनता दर्शन की फोटो शेयर की और लिखा, ”प्रदेश के हर नागरिक की सेवा एवं सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता…यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने आज लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जनपदों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने जन-समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए।”
मुख्यमंत्री योगी चाहे राजधानी लखनऊ रहें या फिर गोरखपुर, इस दौरान वह जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं जरूर सुनते हैं। अधिकारियों से उसके निवारण के लिए निर्देश भी देते हैं।

बच्चों को डायरिया से सुरक्षित बनाना योगी सरकार की प्राथमिकता, स्वास्थ्य केंद्रों पर बनाए गए ओरआरएस और जिंक कार्नर

लखनऊ । शून्य से पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से सुरक्षित बनाना योगी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। इसके लिए पूरे प्रदेश में ‘डायरिया रोको’ अभियान (स्टॉप डायरिया कैम्पेन) चलाया जा रहा है। 31 जुलाई तक चलने वाले अभियान के तहत विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से डायरिया के प्रति जन जागरूकता की अलख जगाई जा रही है। डायरिया से बचाव, कारण, रोकथाम व उपचार से जुड़े संदेशों वाले पोस्टर-बैनर व आडियो/वीडियो से सुसज्जित वाहन गली-मोहल्लों में पहुंच रहे हैं और लोगों को जागरूक बना रहे हैं। स्कूली बच्चों के बीच विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित कर जागरूकता के संदेश जन-जन तक पहुंचाए जा रहे हैं। दीवार लेखन और सार्वजनिक स्थलों पर ओआरएस- जिंक कार्नर बनाए गए हैं, निजी अस्पतालों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।

योगी सरकार द्वारा डायरिया के प्रति समुदाय स्तर पर जनजागरूकता बढ़ाने, लोगों को ओआरएस और जिंक की महत्ता को भली भांति समझाने के लिए पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर चलाए जा रहे स्टॉप डायरिया कैंपेन की इस साल की थीम- ‘डायरिया की रोकथाम, सफाई और ओआरएस से रखें अपना ध्यान’ तय की गई है। अभियान का उद्देश्य बच्चों में डायरिया की रोकथाम, ओआरएस व जिंक के उपयोग को प्रोत्साहन और जनसामान्य में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके तहत जिलों में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिसमें विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं भी स्वास्थ्य विभाग के सहयोग में जुटी हैं। पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया (पीएसआई इंडिया) और केनव्यू ने स्टॉप डायरिया कैम्पेन में सहयोग के लिए ‘डायरिया से डर नहीं’ जैसा कार्यक्रम संचालित कर एक अनूठी पहल की है।

सीएम योगी के निर्देश पर पीएसआई इंडिया पहले चरण में प्रदेश के सात जिलों फिरोजाबाद, मथुरा, मुरादाबाद, बदायूं, उन्नाव, गोंडा और श्रावस्ती में शुरू की गई है। इसके तहत स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस और जिंक कार्नर बनाए गए हैं, निजी अस्पतालों का भी इसमें सहयोग लिया जा रहा है और उनसे क्लिनिक में ओआरएस कार्नर बनाने व डायरिया केस की रिपोर्टिंग की अपील की जा रही है। प्रचार वाहन भी समुदाय के बीच पहुंचकर लोगों को डायरिया के लक्षण, कारण और बचाव आदि के बारे में जागरूक कर रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों जैसे- बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन आदि पर ओआरएस कार्नर बनाए गए हैं और जगह-जगह हस्ताक्षर अभियान भी चलाए जा रहे हैं। सार्वजनिक स्थलों और स्वास्थ्य केंद्रों पर दीवार लेखन के माध्यम से भी जन-जन को जागरूक किया जा रहा है कि डायरिया से डरने की नहीं, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है और डायरिया होने पर बच्चे को जल्द से जल्द ओआरएस का घोल और जिंक का टेबलेट देना है। फ्रंट लाइन वर्कर का अभिमुखीकरण भी किया गया है ताकि वह लोगों को अच्छी तरह से परामर्श प्रदान कर सकें।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि डायरिया आज भी देश में खास तौर पर कमजोर आबादी और पांच साल से कम आयु वर्ग के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में मौजूद है। यह बीमारी और मृत्यु दर के प्रमुख कारणों में से एक बना हुआ है। रोकथाम ही दस्त प्रबंधन की कुंजी है। डायरिया के रोकथाम के लिए मुख्य गतिविधियों में सुरक्षित पेयजल तक पहुंच, बेहतर स्वच्छता, साबुन-पानी से अच्छी तरह से हाथ धोना, पर्याप्त पोषण जिसमें केवल स्तनपान और पूरक आहार शामिल हों , इसके अलावा समय पर बच्चे का टीकाकरण भी कराना शामिल है। इसके साथ ही ओआरएस और जिंक के साथ प्राथमिक उपचार शीघ्र स्वस्थ होने और निवारक उपायों के माध्यम से मृत्यु से बचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दस्त की रोकथाम, उपचार और प्रबन्धन से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए हर साल डायरिया रोको अभियान (स्टॉप डायरिया कैम्पेन) चलाया जाता है। हर साल की भांति इस साल भी 16 जून से 31 जुलाई तक यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जा रहा है। अभियान से पूर्व आशा कार्यकर्ताओं द्वारा गांव के पांच साल तक के बच्चों की सूची तैयार कराई जा चुकी थी, ऐसे बच्चों वाले घरों के सदस्यों को ओआरएस और जिंक की महत्ता को भलीभांति समझाया गया है । ओआरएस के पैकेट भी इन बच्चों के परिवार वालों को प्रदान किए गए हैं कि ताकि आपात स्थिति में वह उसका आसानी से इस्तेमाल कर सकें ।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के महाप्रबंधक बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम डॉ. मिलिंद वर्धन का कहना है कि आज भी शून्य से पांच साल तक के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण डायरिया है, जबकि दस्त की रोकथाम और उपचार पूरी तरह संभव है। बच्चे को दिन भर में तीन या तीन से अधिक बार दस्त हो तो समझना चाहिए कि बच्चा डायरिया से ग्रसित है और ऐसे में उसको तत्काल ओआरएस का घोल देना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए, साथ ही निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही जिंक टेबलेट उम्र के मुताबिक़ निर्धारित खुराक और निर्धारित अवधि तक देना शुरू कर देना चाहिए। ओआरएस जहां शरीर में पानी की कमी को दूर करता है वहीं जिंक दस्त की अवधि को कम करता है। इसके साथ ही बच्चे की इम्युनिटी को भी मजबूत बनाता है। डायरिया के दौरान यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मां का दूध पीने वाले बच्चे को दस्त के दौरान भी स्तनपान जारी रखें। मां का दूध बच्चे को पोषण और ताकत देता है।

पीएसआई इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मुकेश शर्मा का कहना है कि बारिश और उमस में बच्चा डायरिया की चपेट में कई कारणों से आ सकता है, जैसे- दूषित जल पीने से, दूषित हाथों से भोजन बनाने या बच्चे को खाना खिलाने, खुले में शौच करने या बच्चों के मल का ठीक से निस्तारण न करने आदि से। इसलिए शौच और बच्चों का मल साफ करने के बाद, भोजन बनाने और खिलाने से पहले हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह अवश्य धोएं।

पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूमि स्वामित्व, सीएम योगी का बड़ा निर्देश

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर राज्य के विभिन्न जिलों में बसाए गए परिवारों को विधिसम्मत भूस्वामित्व अधिकार देने की दिशा में ठोस कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा कि यह केवल भूमि के हस्तांतरण का मामला नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों के जीवन संघर्ष को सम्मान देने का अवसर है, जिन्होंने देश की सीमाओं के उस पार से भारत में शरण ली और दशकों से पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इन परिवारों के प्रति संवेदनशील और सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाए। यह शासन की नैतिक जिम्मेदारी है।

अधिकारियों ने बताया कि विभाजन के पश्चात 1960 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए हजारों परिवारों को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर और रामपुर जनपदों में पुनर्वासित किया गया था। प्रारंभिक वर्षों में इन परिवारों को ट्रांजिट कैंपों के माध्यम से विभिन्न गांवों में बसाया गया और भूमि आवंटन भी किया गया, किंतु कानूनी और अभिलेखीय विसंगतियों के चलते अधिकांश को आज तक वैध भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सके हैं।

मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बिजनौर सहित कई जिलों में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए परिवारों को वर्षों पूर्व बसाया गया था और उन्हें कृषि भूमि भी आवंटित की गई थी। हालांकि, समय के साथ अभिलेखीय त्रुटियां, भूमि का वन विभाग के नाम दर्ज होना, नामांतरण की प्रक्रिया लंबित रहना अथवा भूमि पर वास्तविक कब्जा न होने जैसी कई प्रशासनिक व कानूनी जटिलताओं के चलते इन परिवारों को अब तक विधिसम्मत भूस्वामित्व अधिकार प्राप्त नहीं हो सके हैं। कुछ स्थानों पर अन्य राज्यों से आए विस्थापित भी बसाए गए हैं, जो आज भी भूमि स्वामित्व से वंचित हैं।

अद्यतन स्थिति के अनुसार, एक ओर जहां कई गांवों में वर्षों से खेती कर रहे परिवारों ने भूमि पर स्थायी आवास बना लिए हैं, वहीं राजस्व अभिलेखों में उनके नाम आज भी दर्ज नहीं हैं। दूसरी ओर, कुछ ग्रामों में वास्तव में आज भी उन परिवारों का कोई अस्तित्व नहीं है, जिन्हें पहले वहां बसाया गया था। कई परिवारों ने बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए भूमि पर कब्जा किया है, जिससे समस्या हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मामलों में पूर्व में भूमि का आवंटन गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट के तहत हुआ था, उन्हें ध्यान में रखते हुए वर्तमान विधिक ढांचे में नए विकल्प तलाशे जाएं, क्योंकि यह अधिनियम 2018 में निरस्त किया जा चुका है। यह संवेदनशील प्रयास दशकों से उपेक्षित विस्थापित परिवारों के लिए एक नई उम्मीद और गरिमापूर्ण जीवन का द्वार खोलने वाला साबित हो सकता है। इसे केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि ‘सामाजिक न्याय, मानवता और राष्ट्रीय जिम्मेदारी’ के रूप में देखना चाहिए।

CBSE ने सभी स्कूलों को ऑडियो-विजुअल CCTV कैमरे लगाने का दिया निर्देश

नई दिल्ली। सीबीएसई (CBSE) ने उप-कानून में संशोधन करते हुए स्कूलों में सुरक्षा के संबंध में वास्तविक समय की ऑडियो-विजुअल रिकॉर्डिंग के साथ स्कूल के सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, लॉबी, गलियारे, सीढ़ियों, सभी कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, कैंटीन क्षेत्र, स्टोर रूम, खेल के मैदान और शौचालयों और वॉशरूम को छोड़कर अन्य सामान्य क्षेत्रों में ऑडियो-विजुअल सुविधा के साथ उच्च रिज़ॉल्यूशन वाले सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया है।

सारा तेंदुलकर फ्रांस में ऐसे कर रही हैं इंजॉय, बालों को लेकर पूछे ये सवाल

मुंबई: सारा तेंदुलकर आजकल दुनिया के हर कोने में घूम रही हैं और हर पल का मजा ले रही हैं. लंदन के बाद वो फ्रांस पहुंच गईं हैं और वहां पर खूब इंजॉय कर रही हैं. इसकी स्टोरी उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पेज पर लगाई है. इस दौरान उन्होंने अपने बालों को लेकर फैंस से सवाल पूछे हैं, जिसका फैंस ने काफी शानदार जवाब दिया है. हाल ही में वो लंदन में विंबलडन मैच देखने पहुंच गई थीं. वो टीम इंडिया के पूर्व खिलाड़ी युवराज सिंह की डिनर पार्टी में भी नजर आई थीं. अब फ्रांस में जगह-जगह घूम रही हैं और पल का मजा ले रही हैं.

सारा ने इंस्टाग्राम पर शेयर की स्टोरी
फ्रांस में 14 जुलाई से ही फ्रेंच क्रांति की शुरुआत हुई थी. भारत के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर इसका जश्न मनाने फ्रांस गई हैं. इस दौरान वो समुद्र में बोट का मजा लेती हुईं नजर आईं. साथ ही अपने दोस्तों के साथ डांस भी करती हुई दिखीं. सारा तेंदुलकर ने इसकी स्टोरी अपने इंस्टाग्राम पेज पर शेयर की है.

इस दौरान उनकी दोस्त साशा जयराम और अलाविया जाफरी भी उनके साथ नजर आईं. साशा एक फैशन डिजाइनर हैं, जबकि अलाविया जाफरी जावेद जाफरी की बेटी हैं और खुद एक प्रभावशाली सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं. इनको फ्रांस में कई प्रोग्राम में शामिल होते हुए देखा गया. सारा इस समय यूरोप भर में घूम रही हैं और अपनी यात्राओं फोटो सोशल मीडिया पर शेयर कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने फैंस से एक सवाल भी पूछ लिया.

बालों को लेकर पूछे सवाल
सारा तेंदुलकर ने अपने इंस्टाग्राम पर पेज पर अपने बालों को लेकर सवाल पूछा है. उन्होंने इसकी स्टोरी लगाई है. उन्होंने फैंस से पूछा, “क्या बैंग्स बनवाना उचित है”. इस पर एक फैंस ने लिखा कि हां, इसे करें! इस दौरान सारा घुघराले में बालों में काफी सुंदर दिख रही हैं.

विंबलडन में नजर आई थीं सारा
इससे पहले सारा तेंदुलकर लंदन में विंबलडन मैच देखती भी नजर आई थीं. उन्होंने विंबलडन के कोर्ट से अपनी तस्वीरें भी शेयर की थीं. इसके अलावा लंदन से ही सारा तेंदुलकर और शुभमन गिल की तस्वीरें भी वायरल हुई थी. वायरल हुई तस्वीर युवराज सिंह की दी डिनर पार्टी की थी, जिसमें सारा अपने पिता सचिन तेंदुलकर के साथ पहुंचीं थी तो शुभमन गिल अपनी टीम इंडिया के साथ आए थे.

मथुरा: यमुना एक्सप्रेस-वे पर भीषण हादसा, वाहन की टक्कर से कार पलटी; 6 की मौत

मथुरा: उत्तर प्रदेश में शुक्रवार देर रात एक भीषण सड़क हादसा हो गया. हादसा मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे पर हुआ. यहां एक अज्ञात वाहन ने एक कार को टक्कर मार दी. अज्ञात वाहन की टक्कर से कार पलट गई. इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. कार में सवार लोग दिल्ली से कानपुर जा रहे थे. पुलिस सूत्रों के अनुसार, हादसा यमुना एक्सप्रेसवे पर माइल स्टोन 140 किमी पर बलदेव थाना इलाके में हुआ.

हादसे के बाद राहगीरों ने पुलिस को इसकी सूचना दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार सवारों को बाहर निकालकर अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों ने 6 लोगों को मृत घोषित कर दिया. जबकि दो घायलों का इलाज जारी है. पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है.

नीले ड्रम के बाद नीली बोरी… टीवी पर देखकर सीखा मर्डर करने का तरीका, प्रेमिका को मारा फिर ठिकाने लगा दी लाश

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के ललितपुर में एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है. बार थाना क्षेत्र में शहजाद बांध के पास नदी में नीली बोरी में मिली महिला की लाश के मामले को पुलिस ने सुलझा लिया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी ने गूगल और यूट्यूब से पहले मर्डर करने का तरीका सीखा फिर जहरीली दवा की जानकारी जुटाकर प्रेमिका की हत्या की कोशिश की. जब उससे भी महिला की मौत नहीं हुई तो आरोपी ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी. इसके बाद उसकी लाश को बोरी में भरकर फेंक दिया.

जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले शहजाद बांध के पास नदी में एक अज्ञात महिला का शव एक नीली प्लास्टिक की बोरी में मिला था. शव की हालत देख पुलिस को हत्या की आशंका हुई. पुलिस ने जब मृतका की पहचान की तो पता चला की वह रानी नाम की महिला थी जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट परिजनों ने पहले ही दर्ज करवाई थी.

जांच में पता चला कि मृतका का पिछले एक साल से जगदीश रैकवार नाम के युवक से प्रेम संबंध चल रहा था. आरोपी जगदीश ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया कि उसका अपने दोस्त नरेंद्र की पत्नी रानी से प्रेम संबंध था. रानी ने अपने पति और बच्चों को छोड़कर जगदीश के साथ रहना शुरू कर दिया था. लेकिन हाल ही में रानी ने इंस्टाग्राम के माध्यम से यशवंत गुर्जर नामक युवक से दोस्ती कर ली थी. जिससे जगदीश नाराज हो गया.

बढ़ गए थे दोनों के बीच झगड़े
जगदीश ने बताया कि रानी के दूसरे युवक से संपर्क के बाद दोनों के बीच झगड़े बढ़ गए थे. इसी के चलते उसने गूगल और यूट्यूब पर कीटनाशक की जानकारी लेकर हत्या की योजना बनाई. 7 जुलाई 2025 को उसने कोल्ड ड्रिंक में कीटनाशक मिलाकर रानी को पिला दिया. जब उसकी मौत नहीं हुई तो गला दबाकर हत्या कर दी.

फर्जी पोस्ट कर बनाई कहानी
रात में शव को बोरी में भरकर बाइक से नदी में फेंक दिया और पुलिस को भ्रमित करने के लिए रानी के मोबाइल से यशवंत के साथ फर्जी पोस्ट सोशल मीडिया पर डाली. आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने कीटनाशक की बोतल और मृतका का मोबाइल बरामद कर लिया है. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और पूरे मामले की जांच जारी है.

हफ्ते में कितने दिन बाद धोने चाहिए बाल? जानें स्कैल्प हेल्थ से जुड़ी जरूरी बातें

नई दिल्ली: आजकल की अनहेल्दी लाइफस्टाइल और बदलते मौसम में बालों की देखभाल करना बहुत जरूरी है. मानसून में अक्सर हमने देखा है कि लोगों में हेयर फॉल की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है. वहीं, कभी-कभी बालों को ज्यादा बार धोने से भी बालों की हेल्थ पर असर पड़ता है. कुछ लोग बालों को गैप देकर धोते हैं, तो कुछ रोजाना ही बालों को धो लेते हैं. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि हफ्ते में कितनी बार और कैसे बालों को धोना सेफ होता है? या लंबे समय तक बालों को न धोएं तो क्या होता है?

दरअसल, बाल धोने की सही फ्रीक्वेंसी न सिर्फ आपके बालों की बनावट पर निर्भर करती है, बल्कि आपके स्कैल्प की हेल्थ, ऑयल प्रोडक्शन और लाइफस्टाइल पर भी बेस्ड होती है. तो चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि स्कैल्प की सेहत को ध्यान में रखते हुए बाल धोने का सही तरीका क्या होना चाहिए, बार-बार धोने से कौन से नुकसान हो सकते हैं?

बाल धोने का सही शेड्यू क्या है?
अगर आपकी स्कैल्प बहुत ज्यादा ऑयली है, तो आपको बार-बार बाल धोने की जरूरत पड़ सकती है, वहीं अगर आपके बाल ड्राय या कर्ली हैं, तो बार-बार धोने से उनमें मौजूद नेचुरल ऑयल खत्म हो सकता हैं. मौसम, एक्सरसाइज की मात्रा, डस्ट और पॉल्यूशन जैसे कई फैक्टर भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि एक्सपर्ट भी हर किसी के लिए एक जैसे नियम लागू नहीं करते, बल्कि स्कैल्प की जरूरत के हिसाब से हेयरवॉश रूटीन तय करने की सलाह देते हैं.

लंबे समय तक बाल न धोने से क्या होता है?
हेल्थलाइन के मुताबिक, रोजाना बाल धोने से बालों के सेहत पर बुरा असर पड़ता है. इसे बाल रूख, बेजान और कमजोर हो सकते हैं. लेकिन वहीं, अगर आप बालों को बहुत कम धोते हैं तो ये भी समस्या की वजह बन सकता है. जैसे बालों को कम धोने से बालों में डैंड्रफ से लेकर खुजली की समस्या हो सकती है. इसके अलावा अगर आप अपने बालों को लंबे समय तक नहीं धोते हैं तो ये स्कैल्प में बदबू का कारण बन सकता है. भले ही आप कोई खुशबूदार प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हो.

ड्राई हेयर वालें हफ्ते में कितनी बार धोएं बाल?
हफ्ते में कितनी बार बाल धोना है ये हमारी बालों की हेल्थ पर निर्भर करता है. लेकिन अगर आपके बाल बहुत ज्यादा ड्राई हैं तो आप हफ्ते में 1 बार बाल धोएं तो बेहतर हैं. इससे बाल कम ड्राई होंगे और उसमें मॉइस्चर बना रहेगा. खासकर जिन लोगों के बाल केमिकल ट्रीटमेंट से गुजरे होते हैं या जिनकी उम्र ज्यादा होती है, उनके बाल आमतौर पर रूखे हो जाते हैं. ऐसे में अगर वो एक हफ्ते तक बाल नहीं धोते, तो इससे उनके बालों की नमी बनी रह सकती है और ड्रायनेस से बचाव हो सकता है.

कितने समय तक बिना बाल धोए रह सकते हैं?
फिलहाल, इसके लेकर अभी तक कोई रिसर्च सामने नहीं आई है कि कितने दिन तक बिना बाल धोएं रहा जा सकता है. क्योंकि सभी के बालों की हेल्थ और लाइफस्टाइल अलग-अलग होती है. कुछ लोग 1 दिन छोड़कर बाल धोते हैं तो कुछ हफ्ते में 2 बार. ऐसे में आप अपनी बालों की हेल्थ और टाइप को देखते हुए बालों की केयर कर सकते हैं.