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भारत में टियर 2 शहरों में तेजी से बढ़ रहा ईवी चार्जिंग नेटवर्क, स्टेशनों की संख्या 4,600 के पार

नई दिल्ली: भारत के टियर 2 शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन यानी ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विस्तार कर रहा है। 1 अप्रैल 2025 तक इन शहरों में ऑपरेशनल ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या बढ़कर 4,625 हो गई है। लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में इस्पात एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने यह जानकारी साझा की।

पीएम ई-ड्राइव योजना से मिला बल

सरकार ने अक्टूबर 2024 में शुरू की गई पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत टियर 2 शहरों सहित पूरे भारत में सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस योजना के तहत ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए 10,900 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है।

निजी उद्यमियों को भी अवसर

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना एक गैर-लाइसेंस गतिविधि है, जिससे निजी उद्यमी भी इस क्षेत्र में निवेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना मांग आधारित है और यह ईवी की पहुंच जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है, इसलिए इसका कोई निश्चित लक्ष्य निर्धारित नहीं किया जा सकता।”

फेम-II योजना का योगदान

केंद्र सरकार ने फेम-II योजना के तहत तीन तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, और HPCL) को 8,932 ईवी चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए 873.50 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। पिछले तीन वर्षों में देश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों की संख्या 5,151 से बढ़कर 26,000 हो गई है, जो इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए नई पहल

इस महीने की शुरुआत में, सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रकों) के लिए वित्तीय प्रोत्साहन शुरू किया, जिसमें प्रति वाहन अधिकतम 9.6 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। इस पहल से देश भर में लगभग 5,600 ई-ट्रकों की बिक्री को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

भविष्य की संभावनाएं

टियर 2 शहरों में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार और सरकारी प्रोत्साहन इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की गति को और तेज करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि छोटे शहरों में हरित परिवहन को बढ़ावा देकर आर्थिक विकास को भी गति देगा।

पान की खेती के लिए मिलेगा अनुदान, सरकार ने दी योजना को स्वीकृति

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नई दिल्ली: किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा विभिन्न फसलों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस कड़ी में बिहार सरकार ने राज्य में पान विकास योजना को मंजूरी दे दी है। उप मुख्यमंत्री सह कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि चतुर्थ कृषि रोड मैप अंतर्गत पान उत्पादक किसानों के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना “पान विकास योजना” को लागू किया गया है। इस योजना की स्वीकृति राज्य स्कीम मद से वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2025-26 तक दो वर्षों के लिए प्रदान की गई है।

कृषि मंत्री ने बताया कि योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 499.375 लाख की निकासी एवं व्यय की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के सात पान उत्पादक जिलों नालंदा, नवादा, गया, औरंगाबाद, शेखपुरा, वैशाली और सारण के इच्छुक किसानों को पान की खेती में विस्तार के लिए आवश्यक सहायतानुदान प्रदान करना है, जिससे पान की उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में इजाफा सुनिश्चित हो सके।

पान की खेती के लिए कितना अनुदान मिलेगा?
योजना के तहत मगही एवं देशी पान की खेती करने वाले किसानों एवं एफपीसी के सदस्यों को न्यूनतम 100 वर्ग मीटर (0.01 हेक्टेयर) से अधिकतम 300 वर्गमीटर तक की खेती के लिए लाभान्वित किया जाएगा। सहायता अनुदान के रूप में लाभार्थी किसानों को 11,750 रुपए से लेकर अधिकतम 32,250 रुपए तक की राशि दी जाएगी। लाभार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा, जिससे योजना में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी।

इसके अतिरिक्त उद्यान निदेशालय द्वारा किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पान उत्पादन की नवीनतम तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। कृषि मंत्री ने कहा कि यह योजना बिहार के पारंपरिक पान उत्पादन को वैज्ञानिक आधार देने और आधुनिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक प्रभावी कदम है। यह ना केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि स्थानीय पहचान वाले पान को संरक्षण भी प्रदान करेगी।

ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी शुल्क के पीछे ब्रिक्स और घाटे का हवाला दिया

नई दिल्ली: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 प्रतिशत शुल्क लगाने को लेकर बुधवार को ब्रिक्स समूह व नयी दिल्ली के साथ ‘भारी’ व्यापार घाटे का हवाला दिया और कहा कि अमेरिका इस समय भारत के साथ बातचीत कर रहा है।

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा, “हम अभी बातचीत कर रहे हैं और इसमें ब्रिक्स का मसला भी शामिल है। आप जानते हैं, ब्रिक्स मूलतः अमेरिका विरोधी देशों का एक समूह है और भारत इसका सदस्य है। यह अमेरिकी मुद्रा पर हमला है और हम किसी को भी ऐसा नहीं करने देंगे।”

ट्रंप ने बुधवार को एक अगस्त से भारत से आने वाले सभी सामानों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। राष्ट्रपति ने इसके साथ ही रूसी कच्चे तेल और सैन्य उपकरणों की खरीद पर एक अनिर्दिष्ट जुर्माना भी लगाने की घोषणा की।

ट्रंप ने कहा, “यह निर्णय आंशिक रूप से ‘ब्रिक्स’ की वजह से लिया गया है और इसमें कुछ हद तक घाटे की भूमिकी है। हमें बहुत बड़ा घाटा हुआ है। जैसा कि आप जानते हैं, प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी मेरे मित्र हैं लेकिन वे हमारे साथ व्यापार के मामले में बहुत ज्यादा जुड़े नहीं हैं।

गाजा में खाद्य सामग्री पाने का इंतजार कर रहे 48 फलस्तीनी मारे गए

नई दिल्ली: गाजा पट्टी में खाद्य सामग्री की प्रतीक्षा कर रहे कम से कम 48 फलस्तीनी मारे गए और दर्जनों घायल हो गए। एक अस्पताल ने यह जानकारी दी। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राजदूत संघर्ष समाप्त कराने संबंधी वार्ता के लिए इजराइल पहुंच रहे हैं।

गाजा शहर के शिफा अस्पताल ने बताया कि ये लोग ज़िकिम क्रॉसिंग पर मौजूद भीड़ का हिस्सा थे। इसी क्रॉसिंग से उत्तरी गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाई जाती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि गोलीबारी किसने की और क्रॉसिंग पर नियंत्रण रखने वाली इजराइल की सेना ने भी इस पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है।

इजराइली सेना का कहना है कि वह केवल चरमपंथियों को निशाना बना रही है और वह नागरिकों की मौत के लिए हमास को जिम्मेदार ठहराती है क्योंकि इस समूह के चरमपंथी घनी आबादी वाले इलाकों में सक्रिय हैं।

भूख संकट पर अग्रणी अंतरराष्ट्रीय प्राधिकरण के अनुसार इजराइल की सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी के कारण लगभग 20 लाख फलस्तीनयों के समक्ष अकाल जैसे हालात हैं।

अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ, लगभग 22 महीने से जारी युद्ध को समाप्त कराने और सात अक्टूबर को हमास के हमले में बंधक बनाए गए लोगों को रिहा कराने के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया का पहला स्वदेशी रॉकेट ‘एरिस’ उड़ान भरने के 14 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त

नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया-निर्मित पहला कक्षीय प्रक्षेपण यान बुधवार को उड़ान भरने के 14 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। ‘गिलमोर स्पेस टेक्नोलॉजीज’ द्वारा प्रक्षेपित एरिस नामक कक्षीय प्रक्षेपण यान देश में तैयार किया गया पहला कक्षीय प्रक्षेपण यान है, जिसे छोटे उपग्रहों को कक्षा में ले जाने के लिए तैयार किया गया था।

इसका परीक्षण बुधवार सुबह क्वींसलैंड राज्य के उत्तरी हिस्से में बोवेन शहर के पास एक ‘स्पेसपोर्ट’ से किया गया। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया द्वारा जारी किए गए वीडियो में 23 मीटर (75 फुट) लंबा रॉकेट, लॉन्च टावर से ऊपर उठता और हवा में मंडराता दिखाई दिया फिर आंखों से ओझल हो गया। उस जगह से धुएं के गुबार उठते देखे गए हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

कंपनी ने सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर पोस्ट किए गए एक बयान में इस प्रक्षेपण को सफल बताया। प्रवक्ता ने बताया कि सभी चार ‘हाइब्रिड-प्रोपेल्ड इंजन’ ने काम किया तथा पहली उड़ान में इंजन ने 23 सेकंड तक काम किया, उड़ान का समय 14 सेकंड रहा।

भारतीय चाय उद्योग पर संकट के बादल, ITA ने उत्पादन में गिरावट और सस्ते आयात पर जताई गहरी चिंता

नई दिल्ली। भारतीय चाय उद्योग (Tea Industry) को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय चाय संघ (Indian Tea Association) ने बुधवार को यह बयान दिया। आईटीए के अनुसार यह उद्योग 2025 में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। उद्योग को उत्पादन में कमी, मूल्य प्राप्ति (Price Realization) में गिरावट और अधिक आयात के कारण भारी चुनौतिययों का सामना कर रहा है।

आईटीए ने कहा कि 2024 में फसल उत्पादन (Crop Production) में भारी कमी देखी गई। देशव्यापी स्तर 2023 से 109 मिलियन किलोग्राम कम हो गया। आईटीए ने कहा कि उत्पादन में यह कमी खराब मौसम की स्थिति और बागानों में कीटों के हमलों के कारण हुई। एसोसिएशन के अनुसार, 2025 का कम उत्पादन स्तर पश्चिम बंगाल और असम के बड़े उत्पादकों के लिए बड़ी चिंता का विषय है। दार्जिलिंग चाय उद्योग को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यहां उत्पादन स्तर 2024 के स्तर से 10.34 प्रतिशत कम है।

आईटीए ने कहा कि 2025 में दैनिक तापमान में औसतन दो डिग्री सेल्सियस की वृद्धि और कम वर्षा के कारण शुष्क परिस्थितियां पैदा हो रही हैं। इससे दो प्रमुख उत्पादक राज्यों में उत्पादन में गिरावट देखने को मिली। जुलाई की फसल भी कमजोर रहने की उम्मीद है। इसमें 2024 की तुलना में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। इसके अलावा अप्रैल से जुलाई के अंत तक चाय की नीलामी की कीमतों में भी गिरावट का रुख रहा है। इससे हितधारकों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं।

आईटीए ने कहा कि खासतौर पर सीटीसी और डस्ट चाय की नीलामी कीमतों में असम में लगभग सात प्रतिशत और पश्चिम बंगाल के डुआर्स में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। सीटीसी किस्म की कीमतों में गिरावट उद्योग की आर्थिक स्थिरता के लिए चिंता का कारण है। सीटीसी चाय, जिसका अर्थ है क्रश, टियर, कर्ल, काली चाय को संसाधित करने की एक विधि है जिसके परिणामस्वरूप छोटे, कठोर दाने बनते हैं। यह अपने मजबूत, तीखे स्वाद के लिए जाना जाता है और आमतौर पर भारतीय मसाला चाय बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

2024 और 2025 की शुरुआत में चाय के आयात में भारी वृद्धि ने भी कीमतों में गिरावट में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि 2024 में कुल आयात 2023 के 245.3 लाख किलोग्राम से 82 प्रतिशत बढ़कर 445.3 लाख किलोग्राम हो गया। इसमें नेपाल और केन्या का हिस्सा 74 प्रतिशत रहा। 2025 में जनवरी से अप्रैल के दौरान कुल 85.77 मिलियन किलोग्राम चाय का निर्यात हुआ। यह 2024 की इसी अवधि की तुलना में 0.18 मिलियन किलोग्राम कम है।

खीरा बनाम तोरी: कौन सी सब्ज़ी है स्वास्थ्यवर्धक है?

दुनिया भर के कई व्यंजनों में खीरा और तोरी दोनों ही प्रिय सब्जियाँ हैं। हालाँकि वे समान दिख सकते हैं और अक्सर व्यंजनों में एक दूसरे के स्थान पर उपयोग किए जाते हैं, लेकिन उनके स्वाद, बनावट और पोषण मूल्य में अलग-अलग अंतर होते हैं। आज हम खीरे और तोरी की तुलना करके यह निर्धारित करेंगे कि कौन सा स्वास्थ्यप्रद विकल्प है।

खीरे मुख्य रूप से पानी से बने होते हैं, जिससे उनमें कैलोरी कम होती है और यह एक उत्कृष्ट हाइड्रेटिंग विकल्प है। इनमें विटामिन के और सी के साथ-साथ पोटेशियम और मैग्नीशियम भी होते हैं। दूसरी ओर, तोरई में कैलोरी और कार्ब्स की मात्रा थोड़ी अधिक होती है, लेकिन अधिक फाइबर होता है, जो उन्हें पाचन और वजन प्रबंधन के लिए फायदेमंद बनाता है। खीरा और तोरी दोनों ही एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं जो शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन से निपटने में मदद करते हैं। खीरे में फ्लेवोनोइड्स और टैनिन जैसे एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जबकि तोरी में विटामिन ए और सी के उच्च स्तर के साथ-साथ ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन जैसे फाइटोन्यूट्रिएंट्स होते हैं, जो आंखों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।

खीरा और तोरी दोनों ही उन व्यक्तियों के लिए उत्कृष्ट विकल्प हैं जो अपना वजन नियंत्रित करना चाहते हैं। खीरे में कैलोरी बहुत कम और पानी की मात्रा अधिक होती है, जो उन्हें एक पेट भरने वाला और हाइड्रेटिंग स्नैक बनाता है जो लालसा को रोकने और अधिक खाने से रोकने में मदद कर सकता है। ज़ुचिनी, अपने फाइबर युक्त मांस के साथ, तृप्ति को बढ़ावा देती है और पाचन में सहायता करती है, जिससे आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है और उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों पर स्नैकिंग की संभावना कम हो जाती है।

खीरे में विटामिन K होता है, जो हड्डियों के चयापचय और हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन K का पर्याप्त सेवन फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने और हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार से जुड़ा हुआ है। तोरी में खीरे जितना विटामिन K नहीं होता है, लेकिन यह कैल्शियम और फास्फोरस जैसे आवश्यक खनिज प्रदान करता है, जो हड्डियों की मजबूती और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। खीरे और तोरी दोनों को अपने आहार में शामिल करने से हड्डियों के समग्र स्वास्थ्य में योगदान हो सकता है और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम हो सकता है।

खीरे में कुकुर्बिटासिन नामक यौगिक होते हैं, जिनका रक्तचाप के स्तर को कम करने की क्षमता के लिए अध्ययन किया गया है। इसके अतिरिक्त, खीरे में उच्च पानी और पोटेशियम सामग्री जलयोजन और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बढ़ावा देकर रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है। पोटेशियम और मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा के साथ तोरी, स्वस्थ रक्तचाप के स्तर और हृदय संबंधी कार्यों को बनाए रखने में भी योगदान देती है।

स्किन को करना चाहते है डीटॉक्स- जानिये 5 कारण जिनकी वजह से आपको अपने खाने में चुकंदर को करना चाहिए शामिल

जैसे ही वसंत का मौसम आता है हम अपने खान पान में कुछ तब्दीलियां करते हैं। हो सकता है वो आपकी त्वचा के लिए अच्छी ना ही। हमें अपनी प्लेट में मौजूद चीजोंको देख कर यह सोचना चाहिए की क्या ये सेहत के लिए अच्छा है।

हम हमारे खाने के ऑप्शन्स पर सोचने की ज़रुरत है , और अपनी डाइट में ताजा, पोषक तत्वों को शामिल करने की ज़रुरत है। अवैलेबल ऑप्शंस की लिस्ट में, चुकंदर एक पावरहाउस सब्जी के रूप में सामने आता है। अपनी साधारण उपस्थिति के बावजूद, जब स्वास्थ्य लाभ की बात आती है तो चुकंदर एक जबरदस्त गुण रखता है। यहां पांच आश्चर्यजनक कारण बताए गए हैं कि आपको अपने वसंत आहार में चुकंदर को क्यों शामिल करना चाहिए।

चुकंदर में प्राकृतिक नाइट्रेट होते हैं जो शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं। नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने, मांसपेशियों और ऊतकों तक रक्त प्रवाह और ऑक्सीजन वितरण में सुधार करने में मदद करता है। यह बढ़ी हुई ऑक्सीजन सहनशक्ति को बढ़ा सकती है और थकान को कम कर सकती है, जिससे व्यस्त वसंत के दिनों में चुकंदर प्री-वर्कआउट ईंधन या ऊर्जा बढ़ाने वाले नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाता है।

चुकंदर फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फाइबर नियमित मल त्याग को बढ़ावा देने में मदद करता है, कब्ज को रोकता है और लाभकारी आंत बैक्टीरिया के विकास में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त, चुकंदर में मौजूद अद्वितीय फाइटोन्यूट्रिएंट्स लीवर के कार्य को उत्तेजित करते हैं और शरीर की प्राकृतिक विषहरण प्रक्रियाओं का समर्थन करते हैं, जिससे विषाक्त पदार्थों और अपशिष्ट उत्पादों को अधिक कुशलता से खत्म करने में मदद मिलती है।

चुकंदर भीतर से आपकी चमक में योगदान कर सकता है। चुकंदर में पाए जाने वाले विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सिडेंट का संयोजन त्वचा को पोषण देने, कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने और यंग स्किन मेनटैन रखने में मदद करता है। अपने आहार में चुकंदर को शामिल करने से त्वचा को युवा दिखने में मदद मिल सकती है, दाग-धब्बे और झुर्रियों कम हो सकती है।

चुकंदर का चमकीला लाल रंग इसकी उच्च एंटीऑक्सीडेंट सामग्री, विशेष रूप से बीटालेंस और एंथोसायनिन का संकेत देता है। ये एंटीऑक्सिडेंट सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद करते हैं, जो हृदय रोग के जोखिम कारक हैं। नियमित रूप से चुकंदर का सेवन रक्तचाप को कम करने, कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार करने और समग्र हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का खतरा कम हो जाता है।

चुकंदर के दिमाग बढ़ाने वाले फायदों को कम मत आंकिए। चुकंदर के प्राकृतिक नाइट्रेट से प्राप्त नाइट्रिक ऑक्साइड मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाकर संज्ञानात्मक कार्य का समर्थन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि चुकंदर का नियमित सेवन संज्ञानात्मक प्रदर्शन को बेहतर बनाने, मानसिक स्पष्टता बढ़ाने और मस्तिष्क स्वास्थ्य का समर्थन करने में मदद कर सकता है।

लिवर और किडनी में चाहते हैं सुधार? हफ्ते में एक बार पिएं यह डिटॉक्स वॉटर

शरीर को स्वस्थ रखने और सभी अंगों के बेहतर कामकाज के लिए शरीर को डिटॉक्स करना बहुत ज़रूरी है। हफ़्ते में कम से कम 1-2 बार शरीर को डिटॉक्स करने से लिवर और किडनी की कार्यप्रणाली बेहतर होती है और वज़न भी कम होता है।

अगर आप अपनी खराब जीवनशैली को संतुलित करना चाहते हैं, तो हफ्ते में 1-2 बार डिटॉक्स वॉटर पिएं। इससे शरीर में जमी गंदगी बाहर निकलती है और शरीर डिटॉक्स होता है। डिटॉक्स वॉटर पीने से लिवर और किडनी की कार्यप्रणाली बेहतर होती है। आजकल डिटॉक्स वॉटर पीने का चलन काफी तेज हो गया है। यह पानी शरीर में जमा फैट को कम करने में मदद करता है और साथ ही, आपको हाइड्रेटेड रहने में भी मदद करता है। भले ही आप रोजाना 8-10 गिलास पानी पीते हों, लेकिन हफ्ते में एक बार 1-2 गिलास डिटॉक्स वॉटर जरूर पिएं। इससे आपके शरीर में जमी सारी गंदगी बाहर निकल जाएगी।

जब आप पानी में कुछ अतिरिक्त चीजें मिलाकर पीते हैं, तो उसे डिटॉक्स वॉटर कहते हैं। इस तरह का पानी आपके शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। इससे ऊर्जा का स्तर बेहतर होता है और वजन कम करने में भी मदद मिलती है। डिटॉक्स वॉटर में ये चीजें होती हैं

डिटॉक्स वॉटर क्या है?

डिटॉक्स वॉटर ताजे फल, सब्जियां या जड़ी-बूटियों को मिलाकर बनाया गया पानी है। आप इसे फ्रूट-इन्फ्यूज्ड वॉटर या फ्रूट सलाद वॉटर भी कह सकते हैं। आप घर पर कई अलग-अलग तरीकों से डिटॉक्स वॉटर बना सकते हैं। डिटॉक्स वॉटर बनाने के लिए आप अपनी पसंद के फल, सब्जियां और जड़ी-बूटियां इस्तेमाल कर सकते हैं। डिटॉक्स वॉटर में लेमन डिटॉक्स और मास्टर क्लींज जैसे डिटॉक्स वॉटर ज़्यादा मशहूर हैं।

वजन घटाने वाला डिटॉक्स वाटर

डिटॉक्स वॉटर वजन घटाने में मदद करता है। इसे पीने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और कैलोरी कम होने की वजह से इस पानी को पीने से मोटापा कम होता है। डाइटिंग करने वाले लोगों को अक्सर इस तरह का डिटॉक्स वॉटर पीने की सलाह दी जाती है। इस तरह के पानी में सोडा और फलों के जूस से भी कम कैलोरी होती है।

लिवर और किडनी की सफाई के लिए डिटॉक्स वॉटर

लिवर को समय-समय पर डिटॉक्स करना चाहिए। इसके लिए आप गर्म हल्दी वाला पानी या हल्दी वाली चाय पी सकते हैं। हल्दी में करक्यूमिन होता है जो सूजन को कम करता है और लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करता है। इसके अलावा आंवला जूस, अदरक और नींबू पानी भी लिवर और किडनी को डिटॉक्स करता है। ग्रीन टी और करेले का जूस भी लिवर और किडनी के फंक्शन को बेहतर बनाने में कारगर है। आप इन चीजों से डिटॉक्स वॉटर बनाकर पी सकते हैं।

वजन कम करने के 7 बेहतरीन तरीके ,पेट भरा हुआ महसूस करेंगे खुद को भूखा रखे बिना, बस कर ले ये काम..

नई दिल्ली: आम तौर पर ज़्यादा खाना तब होता है जब आप अपने शरीर की ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाते हैं। जबकि कभी-कभार ज़्यादा खाना, आदतन ज़्यादा खाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें वजन बढ़ना, पुरानी बीमारियों का जोखिम बढ़ना शामिल हैं। वजन घटाने के लिए डाइट पर रहते हुए, आप कैसे तय कर सकते हैं कि कितना खाना ज़्यादा है? इसके अलावा, अगर आपने बहुत ज़्यादा खा लिया है, तो उन अतिरिक्त पाउंड को कैसे कम करें या कसरत करें। जब अपने आहार को प्रबंधित करने की बात आती है, तो सबसे चुनौतीपूर्ण काम बिना ज़्यादा खाए संतुष्ट महसूस करने के तरीके खोजना होता है। यह कोई रहस्य नहीं है कि ज़्यादा खाने से थोड़े समय के लिए असुविधा और लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ हो सकती हैं।

आम तौर पर ज़्यादा खाना तब होता है जब आप अपने शरीर की ज़रूरत से ज़्यादा खाना खाते हैं। जबकि कभी-कभार ज़्यादा खाना, आदतन ज़्यादा खाने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें वजन बढ़ना, पुरानी बीमारियों का जोखिम बढ़ना और भावनात्मक तनाव शामिल हैं। मूल कारणों की पहचान करना – चाहे वह भावनात्मक खाने की आदत हो या खराब आहार संबंधी आदतें – इस चक्र को तोड़ने की दिशा में पहला कदम है।

धीरे-धीरे खाएं और और हर निवाले का आनंद लें

पेट को मस्तिष्क को यह संकेत देने में लगभग 20 मिनट लगते हैं कि आप तृप्त हो गए हैं, लेप्टिन जैसे हॉरमोन की बदौलत। बहुत जल्दी-जल्दी खाने से मस्तिष्क को पेट भरने का एहसास होने का पर्याप्त समय नहीं मिलता। जल्दी-जल्दी खाना खाने से अक्सर ज़्यादा खाना खाने की आदत पड़ जाती है, जिससे आपको असहजता महसूस होती है। धीरे-धीरे चबाने की आदत डालें, हर निवाले पर ध्यान दें और अपने शरीर को अपनी ज़रूरतों को बताने का समय दें। निवाले के बीच में कांटा नीचे रखें और कम से कम 20 मिनट बीत जाने तक दूसरा खाने की इच्छा को रोकें।

खाने से पहले पानी पिएं
निर्जलीकरण भूख का रूप ले सकता है, जिससे आप बेवजह खाना खा सकते हैं। भोजन से पहले एक गिलास पानी पीने से न केवल यह भ्रम दूर होता है, बल्कि यह आपके पेट को भरने में भी मदद करता है, जिससे स्ट्रेच रिसेप्टर्स सक्रिय होते हैं जो पेट भरे होने का संकेत देते हैं। यह विशेष रूप से वृद्ध लोगों के लिए प्रभावी है, जिन्हें प्यास लगने की कम अनुभूति हो सकती है। एक गिलास पानी आपको असंतुष्ट किए बिना भोजन के हिस्से को कम कर सकता है।

सूप या सलाद से शुरुआत करें
कैलोरी सेवन को कम करने के लिए अधिक कोर्स जोड़ना शायद उल्टा लगे, लेकिन कम कैलोरी वाले सूप या सलाद से अपना भोजन शुरू करना भूख को कम कर सकता है। पानी और फाइबर से भरपूर ये खाद्य पदार्थ आपकी भूख को कम करने में मदद करते हैं। शोध से पता चला है कि एक छोटे से सलाद से शुरुआत करने से कुल भोजन की खपत 12% तक कम हो सकती है। भोजन से पहले तृप्ति के लाभों को प्राप्त करते हुए कैलोरी को नियंत्रित रखने के लिए कम से कम ड्रेसिंग के साथ हल्के सब्जी सूप या सलाद का विकल्प चुनें।

हर भोजन में प्रोटीन शामिल करें
प्रोटीन तृप्ति का एक सुपरस्टार है। इसे पचने में अधिक समय लगता है, यह आपके रक्त शर्करा के स्तर को स्थिर रखता है और भूख को प्रभावी ढंग से कम करता है। लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करने के लिए हर भोजन में चिकन, मछली, टोफू, फलियां या अंडे की सफेदी जैसे लीन प्रोटीन शामिल करें। उदाहरण के लिए, अंडे और ग्रीक दही के प्रोटीन युक्त नाश्ते के लिए मीठे अनाज की जगह लेने से दिन भर भूख को नियंत्रित करने की बेहतर स्थिति बन सकती है।

अच्छी नींद लें

खराब नींद से न केवल आप थक जाते हैं; यह भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन जैसे कि घ्रेलिन और लेप्टिन को भी बाधित करता है। इस असंतुलन के कारण उच्च कैलोरी वाले, मीठे खाद्य पदार्थों की लालसा बढ़ सकती है। इससे निपटने के लिए, हर रात 7-9 घंटे की अच्छी नींद लेने का लक्ष्य रखें। अगर यह संभव नहीं है, तो जर्नल ऑफ़ क्लिनिकल एंडोक्रिनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि 30 मिनट की झपकी भी भूख और लालसा को कम करने में मदद कर सकती है।

ध्यानपूर्वक खाने की आदत डालें
ध्यान से खाना ज़्यादा खाने का एक बड़ा कारण है। चाहे टीवी देखना हो या अपने फ़ोन पर स्क्रॉल करना, ध्यान भटकाने वाली चीज़ें आपको यह पहचानने से रोक सकती हैं कि आपका पेट कब भरा हुआ है। दूसरी ओर, सचेत भोजन आपको अपने शरीर की भूख और तृप्ति के संकेतों को समझने के लिए प्रोत्साहित करता है। अपने भोजन का स्वाद लेने के लिए समय निकालें, इसके स्वाद, बनावट और सुगंध पर ध्यान दें। भोजन के लिए कम से कम 20 मिनट का समय निकालें और स्क्रीन के सामने खाने से बचें। अगर आपको भावनात्मक खाने से परेशानी है, तो जर्नलिंग, वॉकिंग या एक कप चाय पीने जैसे वैकल्पिक तरीकों को आजमाएँ।